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Showing posts from January, 2018

रीते दिन

        रीते दिन   कैसे बीते दिन   कुहासे भरी सर्द सुबह   धुधंलाया सा दिन   कंपकपाती शामें   ओस नहाई रातें   सहमें सिकुड़े मौसम में   सहमा सा मन   खोजे शब्दों में अनल।             कुसुम  

यहां तक

   कुछ कहा मन ने मेरे      पन्ने और कलम की गुफ्तगू ने         रंग दिये पन्ने मेरे