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यहां तक



   कुछ कहा मन ने मेरे
     पन्ने और कलम की गुफ्तगू ने
        रंग दिये पन्ने मेरे

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रीते दिन

        रीते दिन   कैसे बीते दिन   कुहासे भरी सर्द सुबह   धुधंलाया सा दिन   कंपकपाती शामें   ओस नहाई रातें   सहमें सिकुड़े मौसम में   सहमा सा मन   खोजे शब्दों में अनल।             कुसुम